
– वरोरा में ऑनलाइन सट्टे का जाल बेखौफ; कानून को खुली चुनौती!
– “इझी मनी ” के लालच में फंसी युवा पीढी”
राजेंद्र मर्दाने

वरोरा : माना कि, आयपीएल के साथ ही शहर में बडे पैमाने पर सट्टे का कारोबार शुरू हो जाता है। तत्पूर्व आयसीसी टी-२० वर्ल्ड कप के चलते शहर में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी का जाल तेजी से फैलता दिखाई दे रहा है। आज होने वाले भारत – पाकिस्तान मुकाबले पर बड़े पैमाने पर दांव लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है। “इज़ी मनी” के लालच में युवक ही नहीं, बल्कि स्कूली छात्र भी इस अवैध नेटवर्क का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
बता दे कि, सट्टेबाजी में भाव देने वाले को ‘बुकी ‘ तथा दांव लगाने वाले को ‘पंटर ‘ कहा जाता हे। बुकी क्रिकेट मैचों के परिणामों पर जुआ खिलाते है । इंटरनॅशनल स्तरपर चल रहे क्रिकेट मैचों में ऑनलाइन, वेबसाईड, ग्रुपो, एप्स के जरिये सट्टा खिलाया जाता है । क्रिकेट मैचों पर दांव लगाने के लिये ‘ गैबलिंग विंडो ‘ घर बैठे मिल जाती है । बुकी आई डी और पासवर्ड देते है, रोजाना लाखों का कारोबार होता है!
जानकारी के नुसार, सट्टेबाजी रॅकेट का सरगना वणी तहसील में रहकर मिडल मॅन का इस्तेमाल कर खूद ही पूरे नेटवर्क को संचालित करता हे । पंटर टीम की हारजीत, किसी एक खिलाडी के शतक – अर्धशतक, टीम के १० – १० ओवर में रन, चौके -छक्के, विकेट लेने आदिपर दांव लगाते है ।मजबूत टीम का भाव उंचा रहता है। पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए सटोडिए लगातार ठिकाने बदल देते हैं। होटल में रुककर या किराए के मकान लेकर गुप्त रूप से सट्टा संचालित किया जा रहा है। आईडी-पासवर्ड देकर हर गेंद पर ऑनलाइन “बेटिंग” की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। मिडलमॅन का काम सट्टा लगाने वालों से फोनपर बातचीत करना, लेनदेन का रिकार्ड रखना और गेम खत्म होने के बाद हिसाब किताब करना होता है!
सट्टे की भाषा में “खाया – लगाया” जैसे कोडवर्ड से करोड़ों का लेन-देन तय होता है। डिजिटल भुगतान के कारण लेन-देन पर नजर रखना मुश्किल हो रहा है। शहर के विभिन्न चौक-चौराहों और रेलवे स्टेशन क्षेत्र में मिडलमैन की सक्रियता बढ़ने की चर्चा है। ग्रामीण इलाकों तक यह नेटवर्क फैल चुका है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पूर्ण नियंत्रण बुकी के पास होने से आईडी ‘लॉक’ कर खिलाड़ियों को जीतने से रोकने के आरोप भी सामने आए हैं। इससे कई युवक आर्थिक संकट में फंस रहे हैं। ऑन लाईन सट्टे के अलावा शहर – ग्रामीण क्षेत्र में बडे पैमाने पर सट्टा पट्टी का धंदा बेखौफ जोरोपर है. यह कानून के लिये खुली चुनौती है।नागरिक – युवको के साथ स्कुली छात्र भी इस सट्टेबाजी के जाल में फंस रहे है । ऐसे में इन सट्टेबाजों के नाक में नकेल कसने की जरुरत है ऐसी मांग जोर पकड रही है!

